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July 31, 2026 1:29 am

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भ्रष्टाचार के आरोपों से नहीं टूट रहा मेडिकल कॉलेज का नाता

अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज का नाता भ्रष्टाचार के आरोपों से नहीं टूट रहा है। लगातार अलग-अलग मामलों से मेडिकल कॉलेज इलाज व पठन-पाठन के बजाय अनियमितताओं के मामलों में ही सुर्खियों में है। इससे मेडिकल कॉलेज की छवि भी धूमिल हो रही है।
वर्ष 2019 में डॉक्टरों की नर्सरी तैयार करने के लिए मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई थी। इस समय 500 एमबीबीएस विद्यार्थियों का बैच यहां चल रहा है। हर साल 100 डॉक्टर पासआउट हो रहे हैं। सरकार इसे संसाधनों से समृद्ध करने के लिए भी तत्पर है, लेकिन आपसी खींचतान व भ्रष्टाचार के आरोप इसकी साख में बट्टा लगाने का कार्य कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप में हटाए गए थे प्राचार्य डॉक्टर ज्ञानेंद्र
डेढ़ साल पहले तत्कालीन प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुमार को भी भ्रष्टाचार के आरोपों में हटाया गया। उन पर यही के संविदाकर्मी प्रभुनाथ मिश्रा की आत्महत्या में उकसाने का भी आरोप था। यहीं पर तैनात रहे उप प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया, लेकिन वह भी गुटबाजी का शिकार हुए। यहीं पर तैनात छह विभाग अध्यक्षों ने उनके खिलाफ विभिन्न अनियमिताओं के आरोप लगाकर मोर्चा खोल दिया। लिहाजा तीन माह पहले उन्हें भी हटा दिया गया। इसके बाद डॉक्टर दिनेश सिंह मर्तोलिया को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया। उम्मीद थी कि अस्पताल अब अपने ऊपर लगे दागों को धूल कर तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन यह मंशा भी फलीभूत नहीं हुई। लगातार बदहाल होती जा रही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से अस्पताल सुर्खियों में है। इस बीच उन पर भी बिना आर्डर के 139 गत्ता दवाएं मंगाने के आरोप ने फिर से पिछला रिकॉर्ड नहीं तोड़ने दिए।
विधायक अभय सिंह ने की है शिकायत
गोसाईगंज विधायक अभय सिंह ने अवैध रूप से आई इन दवाओं को लेकर चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह से मामले की शिकायत की। इस पर सात मार्च को उन्होंने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। तीन दिन पहले दो सदस्यीय टीम ने कॉलेज पहुंचकर मामले की जांच-पड़ताल की है। इसके बाद फिर से अब मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में आ गया है।
छह विभागाध्यक्षों की भी हुई शिकायत
मेडिकल कॉलेज के जिन छह विभागाध्यक्षों ने विभिन्न अनियमिताओं के आरोप लगाकर पूर्व प्राचार्य डॉक्टर सत्यजीत वर्मा के खिलाफ शिकायत की थी। उनके भी खिलाफ मुख्यमंत्री के दरबार तक शिकायत पहुंची है। बाराबंकी के अधिवक्ता श्रीचंद्र शर्मा ने सभी छह विभाग अध्यक्षों पर अलग-अलग तरह की अनियमिताओं के आरोप लगाकर जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने जिलाधिकारी को इस मामले में पत्र लिखा है।
लड़खड़ा रही हैं चिकित्सीय सेवाएं
आमजन का मानना है कि मेडिकल कॉलेज में आपसी खींचतान से चिकित्सीय सेवाएं मजबूत नहीं हो पा रही हैं। जांच सेवाएं लड़खड़ा उठी हैं। मरीजों को बाहर की दवाओं की पर्ची थमाई जाती है। अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन जैसी कई जांच बाहर से कराई जाती है, जिससे रोगियों का लगातार शोषण हो रहा है।
बमुश्किल दिखाई देते हैं प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज में लगभग तीन माह पहले तैनात हुए प्राचार्य डॉक्टर दिनेश सिंह मर्तोलिया दर्शन नगर स्थित अस्पताल में बमुश्किल दिखाई पड़ते हैं। वह नियमित रूप से अस्पताल का राउंड भी नहीं लेते हैं, जिससे मरीजों की समस्याएं जस की तस बनी हैं। उनका अधिकांश समय गंजा स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में ही व्यतीत होता है।
बोले स्थानीय लोग
मेडिकल कॉलेज से सटी ग्रामसभा सरेठी के प्रधान रक्षाराम यादव, समाजसेवी अखिलेश तिवारी, बीकापुर निवासी अल्केश चतुर्वेदी, अंटरावा के प्रधान उदल यादव, कुशमाहा निवासी विनय सिंह आदि ने बताया कि जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना गौरव की बात है। यदि अच्छे मन से यहां तैनात चिकित्सक इसका संचालन कराते तो जिले समेत आसपास के लोगों को भी काफी लाभ मिलता। अफसोस है कि कॉलेज लगातार अनियमितताओं को लेकर ही चर्चा में है, जो चिकित्सा जगत वह जिले के लिए शर्म की बात है।
Bharat Alert 18
Author: Bharat Alert 18

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