अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला प्रकाश में आने के बाद चढ़ावा देने की प्रक्रिया में बदलाव आया है। अब लोग दान पात्र के बजाय रसीद कटवा रहे हैं।
राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण का असर अब श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके पर भी दिखाई देने लगा है। श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं है, लेकिन मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों में नकद दान करने की बजाय अधिकांश श्रद्धालु अब रसीद कटवाकर या ऑनलाइन माध्यम से निधि समर्पित कर रहे हैं।
उनके अनुसार अधिकांश श्रद्धालु दान काउंटर पर जाकर रसीद के साथ दान कर रहे थे और कुछ लोग ऑनलाइन दान कर रहे थे। उनके साथ आए वीरू दांगी और नीरज दांगी ने भी यही दावा किया। उनका कहना था कि परिसर के विभिन्न मंदिरों में रखे दानपात्र लगभग खाली दिखाई दिए और श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा थी कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रसीद लेकर दान करना अधिक उचित है। उन्होंने स्वयं भी रसीद कटवाकर दान किया।दान पात्रों में अब ज्यादा अर्पित किए जा रहे छोटे नोट
सूत्रों का कहना है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रद्धालुओं का भरोसा दान देने की प्रक्रिया में बदलता दिख रहा है। श्रद्धा और दर्शनार्थियों की संख्या पर इसका असर नहीं पड़ा है, लेकिन दान देने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब दानपात्रों की अपेक्षा रसीद आधारित और डिजिटल दान को अधिक प्राथमिकता मिल रही है। एक दान काउंटर संचालक ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से बेहद कम श्रद्धालु दान पात्र में दान अर्पित कर रहे हैं। जबकि ज्यादातर श्रद्धालु अब दानराशि के रूप में 10, 20 और 50 रुपये के छोटे नोट डाल रहे हैं।
6 जुलाई – 13.20 लाख रुपये
7 जुलाई – 12 लाख रुपये
8 जुलाई – 11 लाख रुपये
9 जुलाई – 10.25 लाख रुपये
10 जुलाई – 9.15 लाख रुपये
उसी बैठक में तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे भी स्वीकार कर लिए गए थे।अब 22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट की नई टीम का ऐलान किया जाएगा। बैठक में डॉ. कृष्ण मोहन के महासचिव पद पर औपचारिक अनुमोदन की पूरी संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसके साथ ही ट्रस्ट में रिक्त पड़े तीन अन्य पदों पर भी नए चेहरों की नियुक्ति की तैयारी अंतिम चरण में बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है और अब केवल औपचारिक घोषणा शेष है। इसी क्रम में अयोध्या राजपरिवार के सदस्य यतींद्र मोहन मिश्र को भी ट्रस्ट में सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की चर्चा तेज है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इन संभावित नियुक्तियों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।




