अयोध्या। हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने दिल्ली में पूर्व सांसद की ओर से आयोजित अयोध्या पर्व में जिले के पुलिस-प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। मंच पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने अयोध्यावासियों के पाबंदियों भरे जीवन का दर्द साझा किया तो समूची अयोध्या नगरी ने स्वयं को उनसे सीधे तौर से जोड़ लिया। अयोध्या में बैठे लोगों ने उनके एक-एक शब्द का समर्थन किया और वह सोशल मीडिया पर पूरी तरह छा गए।
बिना पुलिस की जीहुजूरी के अयोध्या में घुस नहीं सकते आपके मेहमान
अपने वक्तव्य में मिथिलेश नंदनी शरण ने कहा कि अयोध्या ऐसे हो गई है कि आपके मेहमान बिना पुलिस के जीहजूरी के अयोध्या में घुस नहीं सकते हैं। पेशेंट मर जाएगा वहीं, लेकिन बैरियर नहीं खोला जाएगा कि वह अस्पताल तक जा सके। हम लोग सुनते हैं कि कश्मीर के लोगों को सुरक्षा के नाम पर बहुत दुःख है, लेकिन समझ नहीं पाते हैं। अब अयोध्यावासी समझते हैं कि वह दुख कैसे होता है। और फिर कैसे आपके अपने लोग आपके शत्रु हो जाते हैं। कोई सुनता नहीं है। जब अयोध्या आएंगे हमारी पीढ़ी के लोग कहीं से पढ़कर कि अयोध्या आठ खंडों में बंटी हुई है तो उन्हें यहां क्या मिलेगा? ऐसा वातावरण भी नहीं बनाया आपने।
प्रशासन के कुछ लोगों से नहीं है व्यवहार तो दूभर होगा जीना
यदि प्रशासन के कुछ लोगों से आपका व्यवहार नहीं है तो आपका जीना दूभर हो जाएगा। सारे भारत में घूमकर जिन महात्माओं के पांव धोकर पिए जाते हैं, वह अयोध्या के प्रशासन के लिए केवल असामी हैं, साधु भी नहीं हैं। यह दृष्टि आप बना रहे हैं अयोध्या के बारे में, उनको गनर देकर। एक नए अर्थतंत्र का विकास हुआ है, पैसे उड़ाने वाला समाज कई तरह के प्राकृतिक, राजनैतिक, सामरिक आपदाओं के कारण धीरे-धीरे फाइनेंसियल मोड के लिए बहुत अवेयर हुआ है, कम ख़र्चे की ओर बढ़ रहा है। हनीमून के लिए गोवा जाने वाले जोड़े यदि अयोध्या आने लगे तो आप ख़ुश हो जाएंगे कि अयोध्या बहुत विकसित होने लगी है। अयोध्या आए हुए व्यक्ति को क्या मिलेगा अयोध्या में? इतने दिनों में अवध विश्वविद्यालय नाम का एक संस्थान जो अयोध्या का विश्वविद्यालय है, उसके पास हिन्दी विभाग की कक्षाएं नहीं हैं।
असहज हो गया अयोध्या पुलिस-प्रशासन
उनके इन वक्तव्यों को सोशल मीडिया पर देखते ही अयोध्यावासी इससे सीधे तौर से जुड़ गए। मानो किसी ने उनकी भावनाएं सार्वजनिक कर दी हों। मिथिलेश नंदनी शरण ही अयोध्यावासी की जुबान पर गूंज रहे हैं । वहीं, पुलिस-प्रशासन के लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े मंच पर सार्वजनिक हुए इन विचारों से खुद को असहज भी महसूस कर रहे हैं।





